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Ganesha Chaturthi Puja Vidhi Date : गणेश चतुर्थी और विनायक चतुर्थी 2022

Ganesha Chaturthi Puja Vidhi Date : गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है। हर साल भारत के विभिन्न क्षेत्र में गणेश चतुर्थी के दिन बड़े भव्य तरीके से पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है मुख्य रूप से यह त्यौहार महाराष्ट्र राज्य में मनाया जाता है। गणेश उत्सव भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतुर्दशी तक मनाया जाता है. प्राचीन काल में भी गणेश उत्सव का आयोजन होता था इसके प्रमाण हमे सातवाहन, राष्ट्रकूट तथा चालुक्य वंश के काल से मिलते है. गणेश उत्सव को मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने राष्ट्रधर्म और संस्कृति से जोड़कर एक नई शुरुआत की थी|

त्योहार के नाम गणेश चतुर्थी 2022
क्यों मनाते है भगवान गणेश के जन्म उत्सव पर
कैसे मनाते है भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना और उसकी पूजा अर्चना करके
इस साल कब है 31 अगस्त 2022
कहां मानते है पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं मुख्य रूप से महाराष्ट्र में

गणेश चतुर्थी  कथा (Ganesh Chaturthi Story): Ganesha Chaturthi Puja Vidhi Date

एक बार माता पार्वती स्नान के लिए जाती हैं. तब वे अपने शरीर के मेल को इक्कट्ठा कर एक पुतला बनाती हैं और उसमे जान डालकर एक बालक को जन्म देती हैं. स्नान के लिए जाने से पूर्व माता पार्वती बालक को कार्य सौंपती हैं कि वे कुंड के भीतर नहाने जा रही हैं अतः वे किसी को भी भीतर ना आने दे. उनके जाते ही बालक पहरेदारी के लिए खड़ा हो जाता हैं. कुछ देर बार भगवान शिव वहाँ आते हैं और अंदर जाने लगते हैं तब वह बालक उन्हें रोक देता हैं. जिससे भगवान शिव क्रोधित हो उठते हैं और अपने त्रिशूल से बालक का सिर काट देते हैं. जैसे ही माता पार्वती कुंड से बाहर निकलती हैं अपने पुत्र के कटे सिर को देख विलाप करने लगती हैं. क्रोधित होकर पुरे ब्रह्मांड को हिला देती हैं. सभी देवता एवम नारायण सहित ब्रह्मा जी वहाँ आकर माता पार्वती को समझाने का प्रयास करते हैं पर वे एक नहीं सुनती.

तब ब्रह्मा जी शिव वाहक को आदेश देते हैं कि पृथ्वी लोक में जाकर एक सबसे पहले दिखने वाले किसी भी जीव बच्चे का मस्तक काट कर लाओं जिसकी माता उसकी तरफ पीठ करके सोई हो. नंदी खोज में निकलते हैं तब उन्हें एक हाथी दिखाई देता हैं जिसकी माता उसकी तरफ पीठ करके सोई होती हैं. नंदी उसका सिर काटकर लाते हैं और वही सिर बालक पर जोड़कर उसे पुन: जीवित किया जाता हैं. इसके बाद भगवान शिव उन्हें अपने सभी गणों के स्वामी होने का आशीर्वाद देकर उनका नाम गणपति रखते हैं. अन्य सभी भगवान एवम देवता गणेश जी को अग्रणी देवता अर्थात देवताओं में श्रेष्ठ होने का आशीर्वाद देते हैं. तब से ही किसी भी पूजा के पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती हैं.

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